El Nino Impact : भारत में मानसून हमेशा से सिर्फ बारिश नहीं, बल्कि करोड़ों किसानों की उम्मीद और पूरी अर्थव्यवस्था की धड़कन रहा है। लेकिन साल 2026 में स्थिति थोड़ी अलग नजर आ रही है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने चेतावनी जारी कर दी है कि प्रशांत महासागर में एल नीनो (El Nino) सक्रिय हो रहा है, जिसके चलते इस बार मानसून सामान्य से कमजोर रह सकता है।
IMD का अनुमान क्या कहता है? El Nino Impact
IMD ने इस मानसून सीजन (जून-सितंबर) के लिए कुल बारिश को लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) का केवल 90% रहने का पूर्वानुमान दिया है। यानी नीचे सामान्य (Below Normal) बारिश की आशंका है।
जून के पहले 16 दिनों में ही देशभर में बारिश सामान्य से 35% कम दर्ज की गई है। हीटवेव पहले ही खेती, बिजली उत्पादन और आम जनजीवन को प्रभावित कर चुकी है। अब एल नीनो की वजह से स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
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एल नीनो क्या है और भारत पर इसका असर क्यों?
एल नीनो प्रशांत महासागर में समुद्री सतह के तापमान में असामान्य वृद्धि है। यह भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून की हवाओं को कमजोर करता है, जिससे बारिश कम और अनियमित हो जाती है।
संभावित प्रभाव:
- खेती पर: देश में अभी भी लगभग 46% कार्यबल कृषि पर निर्भर है। कम बारिश से खरीफ फसलों (धान, मक्का, सोयाबीन आदि) की बुआई और उत्पादन प्रभावित होगा।
- महंगाई: खाद्य पदार्थ CPI महंगाई में करीब 37% वजन रखते हैं। अनाज, सब्जी और दूध की कीमतें बढ़ने का खतरा।
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था: किसानों की आय घटने से उपभोग, ग्रामीण मांग और छोटे उद्योगों पर असर।
- समग्र GDP: हालांकि कृषि का GDP में हिस्सा अब 14-16% रह गया है, लेकिन इसका अप्रत्यक्ष प्रभाव बहुत बड़ा होता है।
अच्छी खबर: भारत अब ज्यादा तैयार है
पिछले दशक की तुलना में भारत की अर्थव्यवस्था अब कमजोर मानसून को बेहतर तरीके से झेल सकती है।
मुख्य वजहें:
- सिंचित क्षेत्र बढ़कर कुल बुआई का 55% हो चुका है (पहले 49% के आसपास)।
- फसलों का विविधीकरण, MSP का मजबूत समर्थन।
- डायरेक्ट कैश ट्रांसफर (PM-KISAN) और अन्य योजनाएं।
- बेहतर बफर स्टॉक और गैर-कृषि ग्रामीण आय के नए स्रोत।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार एल नीनो का असर 2010 या 2000 के दशक जितना गंभीर नहीं होगा।
सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं ये राज्य
कृषि मंत्रालय ने एक दर्जन राज्यों की पहचान की है जहां बारिश की कमी का सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है। पंजाब-हरियाणा जैसे मुख्य अनाज उत्पादक क्षेत्रों में जुलाई-अगस्त की बारिश बहुत महत्वपूर्ण होगी।
आगे क्या हो सकता है?
अगले 4-6 हफ्तों में बारिश का पैटर्न तय करेगा कि यह साल विकास दर के लिए छोटी बाधा बनेगा या महंगाई-विकास दोनों के लिए बड़ी चुनौती। सरकार, किसान और बाजार सभी सतर्क नजर आ रहे हैं।
सलाह: किसान भाई वैकल्पिक फसलें, बेहतर बीज और पानी बचत वाली तकनीकों पर ध्यान दें। आम निवेशक महंगाई और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े शेयरों पर नजर रखें।
निष्कर्ष:
एल नीनो एक चुनौती है, लेकिन भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था और सरकारी तैयारियां इसे अच्छी तरह संभालने में सक्षम हैं। उम्मीद है कि मानसून कुछ इलाकों में अच्छी बारिश देकर संतुलन बनाए रखेगा।
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