UPI Payment New Rules : क्या अब UPI से पैसे भेजना थोड़ा धीमा हो जाएगा? रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने डिजिटल पेमेंट्स को और सुरक्षित बनाने के लिए बड़े बदलावों का प्रस्ताव रखा है। अगर आप 10,000 रुपये से ज्यादा का ट्रांजेक्शन करते हैं, तो अब पैसे तुरंत क्रेडिट नहीं होंगे। RBI ने एक घंटे का कूलिंग पीरियड या होल्ड सुझाया है, जिस दौरान आप गलती या फ्रॉड होने पर ट्रांजेक्शन रद्द कर सकेंगे। साथ ही, एक ‘किल स्विच’ फीचर भी आने वाला है, जिससे एक बटन दबाकर सभी डिजिटल पेमेंट चैनल बंद हो जाएंगे।
ये बदलाव इसलिए लाए जा रहे हैं क्योंकि 2025 में करीब 28 लाख डिजिटल फ्रॉड के मामले सामने आए, जिनमें कुल 22,931 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। UPI और IMPS जैसी इंस्टेंट पेमेंट सिस्टम की वजह से फ्रॉड होने पर पैसे वापस पाना मुश्किल हो जाता है। RBI का यह डिस्कशन पेपर आम लोगों और एक्सपर्ट्स से 8 मई 2026 तक फीडबैक मांग रहा है।
क्यों ला रहा है RBI ये नई सुरक्षा व्यवस्था? UPI Payment New Rules
डिजिटल पेमेंट्स तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन फ्रॉड भी उसी तेजी से बढ़ रहे हैं। ज्यादातर फ्रॉड अथॉराइज्ड पुश पेमेंट (APP फ्रॉड) के रूप में होते हैं, जहां स्कैमर लोगों को धोखे से खुद ट्रांजेक्शन करने के लिए मजबूर करते हैं।
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RBI के प्रस्ताव के मुख्य उद्देश्य:
- उपयोगकर्ताओं को सोचने का समय देना ताकि वे गलत या फ्रॉडी ट्रांजेक्शन रद्द कर सकें।
- बड़े मूल्य के फ्रॉड को कम करना (10,000 रुपये से ऊपर के ट्रांजेक्शन फ्रॉड के 98.5% वैल्यू के हिसाब से जिम्मेदार हैं)।
- सीनियर सिटीजन और कमजोर वर्गों को अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करना।
10,000 रुपये से ज्यादा ट्रांजेक्शन पर क्या बदलाव?
RBI का मुख्य प्रस्ताव यह है कि UPI, IMPS, NEFT या अकाउंट-टू-अकाउंट ट्रांसफर में 10,000 रुपये से अधिक की राशि पर 1 घंटे का होल्ड लगेगा।
- पैसे भेजने वाले के अकाउंट से तुरंत डेबिट हो जाएगा, लेकिन रिसीवर के अकाउंट में 1 घंटे बाद क्रेडिट होगा।
- इस दौरान अगर आपको शक हो या गलती समझ आए, तो आप ट्रांजेक्शन रद्द कर सकते हैं।
- छोटे ट्रांजेक्शन (10,000 रुपये तक) और मर्चेंट पेमेंट्स पर यह नियम लागू नहीं होगा, ताकि रोजमर्रा की खरीदारी प्रभावित न हो।
- जरूरी ट्रांजेक्शन के लिए व्हाइटलिस्ट (भरोसेमंद संपर्क) या अतिरिक्त वेरिफिकेशन से तुरंत ट्रांसफर का विकल्प भी रखा जा सकता है।
‘किल स्विच’ क्या है और कैसे काम करेगा?
RBI एक वन-स्टॉप किल स्विच फीचर की सिफारिश कर रहा है। अगर आपको फ्रॉड का शक हो, तो मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग, ब्रांच या IVR के जरिए एक बटन दबाकर आप सभी डिजिटल पेमेंट चैनल (UPI, कार्ड, नेट बैंकिंग) को तुरंत बंद कर सकेंगे।
- यह फीचर खासकर तब काम आएगा जब आपका फोन खो जाए या कोई स्कैमर आपके अकाउंट को टारगेट करे।
- किल स्विच चालू करने के बाद इसे दोबारा बंद करने के लिए अतिरिक्त वेरिफिकेशन या ब्रांच विजिट की जरूरत पड़ सकती है।
इसके अलावा, यूजर्स को अपने अकाउंट पर चैनल-वाइज ऑन/ऑफ स्विच, स्वयं तय ट्रांजेक्शन लिमिट और अन्य कंट्रोल्स देने का भी प्रस्ताव है।
सीनियर सिटीजन और बड़े ट्रांजेक्शन के लिए अतिरिक्त सुरक्षा
- 70 साल से ऊपर के सीनियर सिटीजन के लिए 50,000 रुपये से ज्यादा के ट्रांजेक्शन पर ट्रस्टेड पर्सन की मंजूरी जरूरी हो सकती है।
- 2.5 लाख रुपये से ज्यादा की जमा राशि पर बैंक अतिरिक्त वेरिफिकेशन करेंगे।
- विकलांग व्यक्तियों और अन्य कमजोर वर्गों को भी इसी तरह की सुरक्षा दी जा सकती है।
इन बदलावों का आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
सकारात्मक पक्ष:
- फ्रॉड होने पर पैसे वापस पाने की संभावना बढ़ेगी।
- यूजर्स को ज्यादा नियंत्रण मिलेगा।
- खासकर बुजुर्गों और नए यूजर्स के लिए सुरक्षा मजबूत होगी।
नकारात्मक पक्ष:
- बड़े ट्रांजेक्शन में थोड़ी देरी हो सकती है, जो इमरजेंसी में असुविधाजनक हो सकती है।
- लेकिन व्हाइटलिस्ट और बायपास ऑप्शन से रोजाना इस्तेमाल पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा।
अभी क्या है स्थिति और आगे क्या?
ये सुझाव अभी डिस्कशन पेपर के रूप में हैं। RBI 8 मई 2026 तक फीडबैक ले रहा है। इसके बाद विस्तृत गाइडलाइंस जारी की जाएंगी।
अगर आप भी डिजिटल पेमेंट्स का इस्तेमाल करते हैं, तो सतर्क रहें:
- अनजान नंबर से आने वाले कॉल्स पर कभी पैसे न भेजें।
- दो-फैक्टर ऑथेंटिकेशन हमेशा चालू रखें।
- बड़े ट्रांजेक्शन से पहले डबल चेक करें।
निष्कर्ष: RBI का यह कदम डिजिटल इंडिया को सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। थोड़ी सी देरी फ्रॉड से बचाकर लाखों रुपये बचा सकती है। क्या आपको ये बदलाव जरूरी लगते हैं? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।
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